बहुत कम यात्री भारत को वन्यजीवों से जोड़ते हैं, जबकि यह धरती के महान वन्यजीव गंतव्यों में से एक है। दुनिया के अधिकांश जंगली बाघ भारत में हैं - 1973 से प्रोजेक्ट टाइगर के तहत संरक्षित - साथ ही हाथी, तेंदुए, भालू, गैंडे और आखिरी एशियाई शेर भी। अच्छी योजना वाली सफारी किसी भी भारत यात्रा का सबसे यादगार हिस्सा बन सकती है।
बाघ कहां देखें
- रणथंभौर (राजस्थान) - पहाड़ी किले के खंडहरों और झील महलों के बीच बाघ घूमते हैं; दिल्ली-आगरा-जयपुर के स्वर्ण त्रिभुज से पहुंचना आसान।
- बांधवगढ़ (मध्य प्रदेश) - बाघों के सबसे ज्यादा घनत्व के लिए प्रसिद्ध, यानी दिखने की सबसे अच्छी संभावना।
- कान्हा (मध्य प्रदेश) - साल के विशाल जंगल और घास के मैदान जिनसे जंगल बुक की प्रेरणा मिली।
- ताडोबा (महाराष्ट्र) - कम भीड़ और अच्छे दर्शन वाला उभरता सितारा।
- जिम कॉर्बेट (उत्तराखंड) - 1936 में बना भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान।
सफारी कैसे काम करती है
सफारी खुली जीपों (जिप्सी) में सुबह और दोपहर बाद होती है, जब जानवर सबसे सक्रिय रहते हैं। पार्क सीमित परमिट वाले जोन में बंटे हैं, इसलिए ऑनलाइन बुकिंग बहुत पहले करें - लोकप्रिय जोन हफ्तों पहले भर जाते हैं।
कोर जोन (सख्त संरक्षित इलाका, जहां बाघ दिखने की संभावना सबसे ज्यादा) और बफर जोन (आसपास का क्षेत्र, आसान बुकिंग) का फर्क समझें। कोर परमिट न मिले तो बफर सफारी भी बहुत अच्छा अनुभव दे सकती है।
सीजन और समय
ज्यादातर टाइगर रिजर्व अक्टूबर से जून तक खुले रहते हैं और मानसून में बंद हो जाते हैं। सर्दियों में मौसम सुहावना रहता है; अप्रैल-जून में भीषण गर्मी होती है, पर यही गर्मी आपकी दोस्त है - जानवर सूखते जलस्रोतों पर जमा होते हैं, इसलिए बाघ दिखने के लिए यह सबसे अच्छा समय है।
बाघ से आगे: गैंडे, शेर और हाथी
- काजीरंगा (असम, यूनेस्को) - दुनिया के लगभग दो-तिहाई एक सींग वाले भारतीय गैंडे यहीं हैं। हाथी सफारी अब भी होती है पर उस पर सवाल उठते हैं - जीप बेहतर विकल्प है।
- गिर (गुजरात) - धरती पर एकमात्र जगह जहां एशियाई शेर जंगल में बचे हैं।
- पेरियार (केरल) - झील से नाव पर जंगली हाथियों को शांति से देखना; परिवारों के लिए बढ़िया।
- केवलादेव / भरतपुर (राजस्थान, यूनेस्को) - एशिया के सबसे अच्छे पक्षी अभयारण्यों में से एक।
खर्च और तैयारी
सफारी सीट के लिए लगभग 1500 से 4000 रुपये प्रति व्यक्ति का अनुमान रखें, साथ में जीप और गाइड शुल्क जो यात्रियों में बंट जाता है। विदेशियों का परमिट महंगा होता है। पासपोर्ट साथ रखें - गेट पर दस्तावेज मिलाए जाते हैं। हल्के रंग के कपड़े, सर्दी की सुबह के लिए गरम परत और दूरबीन ले जाएं।
सफारी के नियम
- जानवरों को कभी खाना न दें, आवाज धीमी रखें।
- गाड़ी में बैठे रहें - खड़े होने से वन्यजीव विचलित होते हैं।
- ड्राइवर पर जानवरों के बहुत पास जाने का दबाव न डालें - जुर्माना भारी है और जानवरों पर तनाव असली।
- बाघ की कोई गारंटी नहीं है। हर सफारी को खूबसूरत जंगल में लॉटरी की तरह लें - लंगूर, हिरण, चील और जंगल की आवाजें पक्का इनाम हैं, बाघ जैकपॉट है। यही अनिश्चितता असली दर्शन को अविस्मरणीय बनाती है।